2.11.08

मुंबई छोडे़गा भोजपुरी फिल्म उद्योग!

उत्तर भारतीयों के खिलाफ राज ठाकरे के अभियान से बढ़ती असुरक्षा की भावना के बीच 200 करोड़ रुपए का भोजपुरी फिल्म उद्योग मुम्बई से बाहर जाने पर विचार कर रहा है, जिससे इसमें काम करने वाले सैंकड़ों महाराष्ट्रियन कामगारों को नुकसान हो सकता है।
भोजपुरी फिल्म उद्योग में औसतन हर साल 75 फिल्में बनती हैं और इसके दर्शक 25 करोड़ लोग हैं। इसके निर्माण के विभिन्न चरण में राज्य के सैंकड़ों लोगों को रोजगार मिलता है। इस फिल्म उद्योग के तहत मुम्बई में 50 पंजीकृत प्रोडक्शन हाउस हैं। उद्योग ने बिहार एवं उत्तरप्रदेश जैसे कुछ राज्यों की सरकारों से इस संबंध में बातचीत शुरू कर दी है। भोजपुरी सुपरस्टार और निर्माता मनोज तिवारी ने कहा कि हमने उत्तरप्रदेश सरकार को उसके संस्कृति मंत्री सुभाष पांडेय के जरिए लखनऊ में उद्योग की स्थापना के लिए एक प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा हम दिल्ली, नोएडा और पटना जैसे विकल्पों पर भी ध्यान दे रहे हैं। तिवारी का मानना है कि उद्योग को बिहार या उत्तरप्रदेश स्थानांतरित करने से भोजपुरी भाषी लोगों को रोजगार भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि भोजपुरी फिल्म उद्योग बड़ी संख्या में महाराष्ट्र के लोगों को रोजगार देता है, लेकिन इसके बावजूद उत्तर भारत से संबंध के कारण उद्योग को निशाना बनाया जाता है, जबकि इसके दर्शक पूरे देश में हैं।
तिवारी ने कहा हम भय की छत्रछाया में रह रहे हैं। मनसे के लोग आउटडोर शूटिंग के दौरान भी हमें निशाना बनाते हैं। हम यहां सुरक्षित नहीं हैं। अभिनेता तिवारी ने कहा कि उन्हें अपने एक फिल्म की शूटिंग सतारा में उस समय रोक देनी पड़ी जब मनसे के संदिग्ध कार्यकर्ताओं ने यूनिट पर हमला किया। इस फिल्म में बालीवुड के सितारे जैकी श्राफ भी हैं। बाद में फिल्म की शूटिंग अहमदाबाद में पूरी की गई। उल्लेखनीय है कि फरवरी में मनसे के कुछ कार्यकर्ताओं ने तिवारी के उपनगर वर्सोवा स्थित कार्यालय पर कथित रूप से हमला किया था। भोजपुरी फिल्म उद्योग के एक अन्य बड़े सितारे रविकिशन ने स्थानांतरण की योजना की पुष्टि करते हुए कहा कि भय के माहौल में लंबे समय तक कोई उद्योग नहीं काम कर सकता। अगर महाराष्ट्र में प्रतिकूल स्थिति बनी रहती है तो अन्य स्थान पर जाना ही उचित होगा। भोजपुरी फिल्म उद्योग उस समय चर्चा में आया, जब 2003 में मनोज तिवारी की फिल्म 'ससुरा बड़ा पैसे वालाÓ सुपरहिट हुई थी।

जागरण से साभार

3 Comments:

दिनेशराय द्विवेदी said...

जिन्हें केवल अपना खुद का हित साधना है उन्हें मराठियों के हित की क्या पड़ी है। पता तब लगेगा जब दाना पानी बंद होगा और लोग उन्हीं का हुक्का-पानी बंद करेंगे। अकल भी तभी आएगी।

दिवाकर प्रताप सिंह said...
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दिवाकर प्रताप सिंह said...

राज ठाकरे को शायद पता नहीं कि वह इस तरह से महाराष्ट्र का कितना नुकसान कर देंगे। अभी तो राज ठाकरे के समर्थकों को लग रहा है कि यह ठीक हो रहा है पर उनकी इन हरकतों से महाराष्ट्र कितना पिछड़ जाएगा, ये उनको मालूम नहीं है। यदि भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री हटती है तो हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री को भी मुंबई छोड़ना चाहिए।
नानापाटेकर,माधुरी,उर्मिला,वर्षा,सोनाली, लता,उषा,आशा भोंसले इत्यादि ना जाने कितने कलाकार सिर्फ़ हिन्दी भाषा की फ़िल्मों की वजह से ही आज पूरे देश मे लोकप्रिय हुए हैं, हिन्दी का ही नमक खा रहे हैं, पर आज तक एक बार भी हिन्दी भाषियों के पीछे मुंह नहीं खोला।